Uttarakhand News : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सामने आई यह घटना केवल एक मेडिकल केस नहीं है, बल्कि डॉक्टर और मरीज के बीच भरोसे के रिश्ते पर लगा एक गहरा सवालिया निशान है। जिस पेशे को समाज में भगवान का दर्जा दिया जाता है, उसी पेशे से जुड़े एक नाम पर अब गंभीर आरोप लगे हैं।
लाडपुर क्षेत्र के रहने वाले 30 वर्षीय युवक अजय सोनकर की मौत के बाद परिजनों का आरोप है कि पथरी के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने गलत जगह चीरा लगाया, जिससे उनकी जान चली गई। यह मामला अब पुलिस जांच के दायरे में है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
अचानक उठा दर्द, सामान्य हालत में पहुंचे अस्पताल
जानकारी के अनुसार, देहरादून के लाडपुर, कांवली रोड निवासी अजय सोनकर को मंगलवार को अचानक तेज पेट दर्द हुआ |परिजन उन्हें रायपुर थाना क्षेत्र स्थित प्राइमस अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि पित्त की थैली (Gall Bladder) में पथरी है और ऑपरेशन की जरूरत है।
बुधवार की दोपहर तक अजय की हालत सामान्य बताई गई। परिजन बताते हैं कि अजय खुद अपने पैरों से चलकर ऑपरेशन थिएटर तक गए थे। उस समय किसी को यह अंदाजा नहीं था कि कुछ ही घंटों में यह मामला मौत और बवाल में बदल जाएगा।
ऑपरेशन के बाद अचानक मौत की सूचना
ऑपरेशन के बाद देर रात अस्पताल प्रशासन ने अजय के परिजनों को सूचना दी कि अजय की मौत हो गई है। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन जब अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए।
परिजनों का कहना है कि:–
- ऑपरेशन के दौरान गलत जगह चीरा लगाया गया
- सर्जरी सही तरीके से नहीं की गई
- डॉक्टर नशे की हालत में ऑपरेशन करने पहुंचे थे
इन आरोपों के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा हुआ।
पर्ची में नाम किसी और डॉक्टर का, ऑपरेशन किसी और ने किया ?
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि मरीज की पर्ची पर किसी अन्य डॉक्टर का नाम दर्ज था, लेकिन ऑपरेशन रिटायर्ड सर्जन डॉक्टर के.के. टमटा ने किया।
परिजनों का कहना है कि उन्हें इस बदलाव की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। यह सवाल अब जांच का विषय है कि क्या मरीज और परिजनों से लिखित सहमति ली गई थी या नहीं। मेडिकल नियमों के अनुसार, ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर की स्पष्ट जानकारी मरीज को देना अनिवार्य होती है।
अस्पताल में हंगामा, पुलिस को बुलाना पड़ा

अजय की मौत के बाद गुस्साए परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल परिसर में जमा हो गए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि देर रात रायपुर थाना पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।
पुलिस ने समझा-बुझाकर स्थिति को शांत किया और शव को कब्जे में लेकर देहरादून कोरोनेशन अस्पताल की मोर्चरी भेजा गया।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि:–
- शव का पोस्टमार्टम करा दिया गया है
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट होंगे
- परिजनों की तहरीर के आधार पर केस दर्ज किया गया है
फिलहाल पुलिस ने रिटायर्ड सर्जन डॉक्टर के.के. टमटा को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ जारी है।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष हार्ट अटैक से मौत का दावा
इस पूरे मामले पर प्राइमस अस्पताल के निदेशक डॉक्टर जैनेंद्र कुमार ने मीडिया को जानकारी दी।
उनके अनुसार:
- मरीज पहले डॉक्टर के.के. टमटा के निजी क्लीनिक में दिखा था
- डॉक्टर के.के. टमटा अस्पताल के ऑन-कॉल सर्जन हैं
- ऑपरेशन के दौरान मरीज की हृदय गति अचानक बढ़ गई
- मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया
हालांकि अस्पताल प्रशासन के इस बयान और परिजनों के आरोपों में स्पष्ट विरोधाभास नजर आता है।
कानून क्या कहता है?
भारत में मेडिकल लापरवाही को लेकर भारतीय न्याय संहिता, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के स्पष्ट दिशा-निर्देश मौजूद हैं।
यदि जांच में यह साबित होता है कि:
- ऑपरेशन में लापरवाही हुई
- मरीज की सहमति के बिना डॉक्टर बदला गया
- मानक चिकित्सा प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया
तो यह मामला आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आ सकता है।
अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर
फिलहाल इस पूरे मामले की कुंजी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हाथ में है। यही रिपोर्ट तय करेगी कि मौत सर्जरी की वजह से हुई है या दिल का दौरा वास्तविक कारण था या फिर दोनों के बीच कोई सीधा संबंध है
जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन सवाल पूछना गलत नहीं है।
निष्कर्ष
डॉक्टर समाज का अहम स्तंभ हैं, लेकिन जवाबदेही के बिना कोई भी पेशा सुरक्षित नहीं रह सकता। अगर आरोप गलत हैं, तो सच्चाई सामने आनी चाहिए। अगर लापरवाही हुई है, तो कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि एक गलती सिर्फ एक मरीज की नहीं, पूरे परिवार की जिंदगी बदल देती है।
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